Exoplanets: what why and how

Exoplanets: what why and how

littlebigvigyan


आपने कई बार लोगो को ये पूछते सुना होगा की आसमान में कितने तारे है,

जिसका अक्सर ये जवाब मिलता की तुम्हारे सर पर बाल हैं , आसमान में उतने तारे हैं

पर क्या ये सच है ?

 नहीं , एक साधारण आदमी या महिला के सर पर लगभग एक लाख बाल होते है


और हमारे मिल्कीवे आकाशगंगा में लगभग 25,000 करोड़ सितारे हैं

ये एक अनुमान है 


और ऐसी एक लाख करोड़ आकाशगंगायें हमारे ऑब्जरवेबल यूनिवर्स में है।

ये भी एक अनुमान है 

इससे आप अंदाजा तो लगा हीं सकते हैं की आसमान में कितने तारे हैं 


आज हम बात करेंगे उन्ही सितारों के चक्कर लगते हुए ग्रहों की। जिन्हे आम बोलचाल की भाषा में एक्सोप्लेनेट्स भी कहे जाते हैं 

और इस तरह हमारा आज का टॉपिक हुआ exoplanets: what why and how


हमारे पॉडकास्ट में तीन भाग होते है क्या क्यों और कैसे

पहला भाग - क्या 

क्या 

हमारे सौर मंडल के बाहर जितने भी गृह हैं सबको एक साथ मिला कर exo प्लैनेट्स कहते हैं 

जितने भी अरब खरब तारे हैं सब को कम से कम एक ग्रह चक्कर लगता है 

जी हाँ , ये भी एक अनुमान है 

अबतक 3109 तारे हैं, जिनको चक्कर लगता हुआ कोई न कोई ग्रह मिला है

कुल मिला कर 4197 ग्रह खोजे जा चुके हैं और 5405 लाइन में हैं

मतलब, जो की हो सकता है की कोई planet हो या न भी हो कन्फर्म नहीं है


अब बात आती है क्यो

हमारे पॉडकास्ट का दूसरा भाग,


क्यों 

Voyeger1 अबतक का सबसे दूर तक जाने वाला मानव निर्मित चीज है , अभी ये जिस speed से जा रहा है , अगर इसे अपने सबसे नजदीकी तारामंडल, अल्फा सेंचुरी की तरफ मोड़ दें तो इसे वहां तक पहुंचने में 72000 साल लगेंगे।

अब मंगल गृह का तो समझ में आता है की अभी स्पेसक्राफ्ट लांच कर दो और ये 7 महीने में मार्स पर पहुंच जायेगा , 

पर 72000 साल , इतने में हमारी हज़ारो पुश्तें जन्म लेगी और मर जाएगी , और वो भी सबसे नजदीकी तारामंडल तक पहुंचने में। 

तो ऐसे गृह खोज हीं क्यों रहे हैं जहाँ ,हम जा हीं नहीं सकते , फायदा क्या है ?


ये जानना बहुत ही interesting है , no.१. ह्यूमन curiosity, हम इंसानों को किसी  भी चीज के बारे में गहराई से जानने में बहुत interest है, इंसान किसी भी चीज के बारे में सिर्फ थोड़ी जानकारी से खुश नहीं होता है . 

No.२. जिस तरह से हम सबको पता है की हमारा घर इस धरती पर किस देश में है , किस गांव या शहर में हैं ,

ठीक उसी तरह वैज्ञानिकों को भी हमारे पृथ्वी की position इस ब्रह्मांड में कहाँ है और किस स्थिति में है। 

No. ३. Voyager 1 और  2  ४० साल से भी ज्यादा की ब्रह्माण्ड यात्रा करके अब interstellerस्पेस में चले गए हैं, अब वैज्ञानिक उस जगह के बारे में और भी अधिक जानना चाहते हैं जो करोड़ो साल पहले आसपास के stars ki death के बाद उनके materials से भरी पड़ी  है जिनसे वे स्टार्स  बने थे ! 

वायेजर १ को बृहष्पति और शनि ग्रह खोज करने के लिए भेजा गया था जिससे की हम पृथ्वीवासियों को उन ग्रहो के बारे में और भी अधिक जानकारी मिल सके ! 

वॉयेजर २ को यूरेनस  और neptune  के बारे में जानने के लिए भेजा गया था 


और जैसा की आपने कहा की जब हम इतनी दूर जा ही nahi सकते तो ऐसे ग्रहों को ढूंढ़ने का क्या मतलब .. तो आपको जानकार खुशी होगी की वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों का भी अविष्कार अवश्य करेंगे jiski madad se  मानव  भी अंतरिक्ष टूर पर जायेगा भले ही अभी वो दिन काफी दूर नजर आ रहे हैं 



अब बात आती है , कैसे ?

कैसे

चलिए ये तो पता हो गया की exoplanets ढूंढ रहे हैं ,

ये भी की क्यों ढूंढ रहे हैं ,

लेकिन सबसे जरूरी तो ये है की कैसे ढूंढ  रहे हैं

इसके ग्यारह तरीके हैं।



      ग्रह खोजने की विधि       (उस विधि से  खोजे गए कुल ग्रहो की संख्या)
  • Transit (3187)
  • Radial Velocity(810)
  • Microlensing(96)  
  • Imaging (50)
  • Transit Timing Variations(21)
  • Eclipse Timing Variations(16)
  • Pulsar Timing(7)
  • Orbital Brightness Modulation(6)
  • Pulsation Timing Variations(2)
  • Astrometry
  • Disk Kinematics(1)

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